Agniveer Died In Siachen: भारत का पहला अग्निवीर शहीद, क्या सरकार देगी परिजनों को कोई मदद

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Agniveer Died In Siachen

1st Agniveer Died In Siachen 2023: सियाचीन में एक अग्निवीर के शहीद होने की खबर आई है। वाकई यह परिजनों के साथ सभी को दुखी करने वाली खबर है। सेना के प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने भी सियाचीन में शहीद हुए जवान अक्षय लक्ष्मण की मौत पर शोक व्यक्त किया है।

अक्षय महाराष्ट्र के रहने वाले है। जिनकी उम्र 17 से 21 वर्ष के बीच बताई जा रही है। परिवारजनों को जैसे ही खबर मिली मां पिता सहित सभी बुरी तरह टूट गए। क्योंकि अग्निवीर भर्ती महज 4 साल की होती है। जिसे छोड़ने पर महज लगभग 12 लाख रुपए मिलते है। अब क्या सरकार शहीद के परिजनों को मदद देगी। इस बारे में सेना के अधिकारियों से मिली जानकारी यहां सांझा करने वाले है।

सेना ने दी भावपूर्ण बिदाई

फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए शहीद लक्ष्मण को भाव पूर्ण श्रद्धाजली उन्होंने लिखा बर्फ में खामोश है लेकिन जब बिगुल बजेगा तो वह फिर से उठेंगे और मार्च करेंगे। उन्होंने आगे लिखा ऑपरेटर अक्षय लक्ष्मण को गवाते हुए वह सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते है। दुख की इस घड़ी में परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते है। 

सेना द्वारा शहीद लक्ष्मण को पूर्ण सम्मान की तरह आखिरी बिदाई दी गई। जहां गांव वालों ने उनकी शहादत का सम्मान किया। और सभी उनकी आखिरी बिदाई में सामिल हुए। 

क्या सरकार देगी परिजनों को मदद

सरकार की तरफ से अग्निवीर ड्यूटी के दौरान शहीद होने पर 1 करोड़ रुपए की मदद की जाती है। जिसमे 44 लाख रुपए अनुग्रह राशि, अंशदान बीमा के रुप में 48 लाख रुपए, शहीद की मृत्यु की तारीख से 4 साल तक शेष कार्यकाल का पूरा पैसा मिलेगा। सशस्त्र युद्ध हताश कोश से 8 लाख रुपए का योगदान दिया जायेगा। साथ ही शहीद के परिजनों को योगदान की गई सेवा निधि 30 प्रतिशत की राशि भी दी जाएगी। सभी को मिलाकर यह राशि 1 करोड़ से अधिक हो जाती है। जोकि शहीद के परिजनों को दी जाएगी। 

भारत के लिए सियाचीन क्यों है इतना खास

आपको बता दे अक्षय फायर एंड कोर टीम के साथ तैनात थे। सियाचीन पर्वत जोकि बर्फ से बना हुआ है उसकी ऊंचाई लगभग 20 हजार फुट है। जहां तापमान शून्य से भी कम रहता है उस जगह पुरी बटालियन तैनात थी। सियाचीन में सेना के जवान पूरी तरह मुस्तेद रहते है क्योंकि यह इलाका ही पाकिस्तान और चीन को तोड़ने का काम करता है।

यह इलाका भारत के लिए कितना खास है इस बात का अंदाजा आप इससे ही लगा सकते है। अगर यह इलाका भारत के हाथ से निकल जाता है तो चीन और पाकिस्तान मिल जायेगे। अधिक ऊंचा होने के कारण यह युद्ध के समय भी दुश्मनों को मदद करेगा। यही वजह हैं की भारत कभी इस इलाके पर कब्जा नही होने देता। हालांकि चीन इसको लेकर कई बार प्रयास कर चुका है। हर बार वह नाकाम ही रहता है।

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